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Saturday, April 25, 2020

जानिए कैसी है शिवपुरी की भौगोलिक संरचना geographical structure of shivpuri


जानिए शिवपुरी की भौगोलिक संरचना geographical structure of shivpuri


जानिए शिवपुरी की भौगोलिक संरचना geography structure of shivpuri
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जानिए शिवपुरी का इतिहास शिवपुरी की ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि history of shivpuri

मध्यप्रदेश के उत्तर में देश के तीसरे राष्ट्रीय राजमार्ग अगर बम्बई रोड पर स्तिथ शिवपुरी जिला अपनी प्राकृतिक सुषमा और अपने वैभवशाली अतीत के लिए समूचे देश मे जाना जाता है। विंध्याचल पर्वत माला की सुरम्य पहाड़ियों की गोद मे बसे शिवपुरी की समुद्र तल से ऊँचाई 1515 फ़ीट है तथा यह 25° - 26° उत्तर व 77° - 41° पूर्व अक्षांश  व देशान्तर के बीच स्थित है। ग्वालियर संभाग के मध्य में कायम इस जिले का क्षेत्रफल 10278 वर्ग किलोमीटर है। जिले की सीमा सभी ओर से टेढ़ी मेढ़ी है। पूर्व से पश्चिम तक इसकी अधिकतम लंबाई 132 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण की ओर इसकी लंबाई सबसे अधिक चौड़ाई 118 किलोमीटर है।
इसके पूर्व की ओर दतिया तथा झाँसी (उ. प्र.) जिले, पश्चिम में मुरैना तथा बारां (राजस्थान) जिले उत्तर में मुरैना व ग्वालियर जिले तथा दक्षिण में गुना जिला स्थित है।

भू-संरचना -

समूचे जिले की भू-संरचना को मुख्यतः दो प्राकर्तिक विभागों में विभक्त किया जा सकता है।

1. पठारी  2. मैदानी

पठारी भाग सामान्यतः 300 से 450 मीटर ऊँचाई पर स्थित है। इतनी ऊँचाई पर भी दो चार लहरदार सतह बाले मैदान हैं। उत्तर पूर्व में नरवर से दिनारा तक का भाग 300 मीटर से कम ऊँचाई वाला मैदान है।



    भू- संरचना का संक्षिप्त वर्गीकरण हम इस प्रकार कर सकते हैं-

(1) पहाड़ी श्रेड़ियाँ :

a. पश्चमी श्रेणी - सिंध नदी के पश्चिम में यह श्रेणी दक्षिण सीमा से लेकर उत्तर में ऊँची बरोद तक फैली है। इसकी ऊँचाई उत्तर की ओर क्रमशः कम होती जाती है। पतिबर पहाड़ी 529 मीटर तथा रिझारी 498 मीटर ऊँची है। इस श्रेणी का दक्षिणी भाग काले पत्थरों का तथा शेष भाग लाल पत्थरों से बना है।

b. मध्य श्रेणी - यह श्रेणी पिछोर तहसील के दक्षिण में सिंध नदी के पूर्वी किनारे पर टीला तक फैली है। फिर नदी के उस पर मामोनी और सतनवाड़ा होते हुई केसरी पहाड़ी तक गई है। इस श्रेणी की एक शाखा और नाले के पूर्वी किनारे से लेकर नरवर तक पहुँची है परन्तु यह कहीं कहीं टूटी हुई है।

c. पूर्वी पहाड़ी श्रेणीयां - जिले के उत्तर पूर्वी भाग में बुंदेलखंड के लहरदार मैदान हैं। इनमे फैली पहाड़ियों की पाँच संकरी श्रेणीयां हैं। लाल रवेदार पत्थर की ये सभी पहाड़ी श्रेणीयां जिले के दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व की ओर स्थित हैं।

(2) मैदानी क्षेत्र :

a. कुनु नदी की संकरी घाटी- जिले के पश्चमी क्षेत्र में यह एक नीची व संकरी घाटी है।

b. पोहरी का संकरा व लंबा मैदान - पश्चमी क्षेत्र में स्थित यह मैदान रूहानी गांव से लेकर गजीगढ़ तक दक्षिण उत्तर की ओर फैला हुआ है।

c. कोलारस व शिवपुरी के मैदान - यह मैदान दक्षिण में इन्दार नदी और सिंध नदी की घाटियों से लेकर उत्तर में पार्वती नदी तक फैला है। जिले की सर्वाधिक उपजाऊ रेतीली जलोढ़ मिट्टी इसी मैदान में पाई जाती है।

d. सुरवाया और सुभाषपुरा के मैदान - मामोनी से लेकर केसरी तक फैली हुई मध्य की पहाड़ी श्रेणी के पूर्व में स्थित इस मैदान का अधिकांश भाग वनों से आच्छादित है। यह भी उत्तर से दक्षिण की ओर फैले हैं।

e. उत्तरपूर्व का निचला मैदान - जिले के इस सबसे बड़े मैदान का विस्तार नरवर से दिनारा तक है। इस मैदान में पांच छोटी छोटी पहाड़ी श्रेणीयां भी हैं। जिनमें लाल रवेदार मिट्टी की पतली परत पाई जाती है।

प्रमुख नदियाँ :

शिवपुरी जिले में बहने बाली सभी प्रमुख नदियों का बहाव उत्तर की ओर है, इसलिए यह कहा जा सकता है कि जिले का सामान्य ढाल उत्तर की ओर है, सिर्फ उत्तरी सीमा पर स्थित पार्वती नदी इसका अपवाद है जो कि पूर्व की ओर बहती है।
जिले की प्रमुख नदियां इस प्रकार हैं :

(1) सिंध नदी - विदिशा जिले के सिरोंज के समीप लटेरी की पहाड़ियों से उद्भवित सिंध नदी गुना जिले से बहती हुई शिवपुरी की कोलारस तहसील में प्रवेश करती है यह नदी उत्तर पूर्व दिशा में बहती हुई पिछोर व करैरा तहसीलों की सीमा बनाती है। नरवर से बोहंग तक डिस्कस बहाव पूर्व की ओर है आगे चलकर यह नदी ग्वालियर और दतिया जिलों की सीमा बनाती हुई इटावा जिला उ. प्र. में चम्बल नदी से जा मिलती है। इसकी सहायक नदियों में महुअर , गुंजारी, सिंध, तथा इंदार नदी प्रमुख हैं।

(2) पार्वती नदी - झिरी की पहाड़ियों से निकलकर यह नदी उत्तर की ओर बहती है। फिर पूर्व की ओर मुड़कर यह जिले की उत्तरी सीमा बनाती हुई ग्वालियर जिले में पवाया के पाश सिंध मड़ई में मिल जाती है।

(3) बेतवा नदी - रायसेन जिले से बहती हुई बेतवा नदी इस जिले की दक्षिणी पूर्वी सीमा बनाती है। इसी नदी पर माता टीला बाँध बनाया गया है। जिले की दक्षिणी सीमा पर बेचने वाली ओर नदी इसकी सहायक नदी है।

(4) कुनू नदी - चम्बल की सहायक नदी कुनू गुना के उत्तर से निकलकर कोटा, शिवपुरी तथा मुरैना जिलों में बहती हूं चम्बल नदी तक पहुँचती है। शिवपुरी जिले के पश्चिमी भाग में इसकी कुल लंबाई 22 किलोमीटर है।

प्रमुख खनिज

निम्नलिखित खनिज यहाँ की रत्नगर्भा वसुंधरा से प्राप्त होते हैं :-
1. चूने का पत्थर - पोहरी तहसील में
2. तांबा - दिनारा, बरुआनाला, नरौआ विजरावन में थोड़ी मात्रा में पाया जाता है।
3. गेरू - पोहरी तहसील में पारा के पास
4. सिलिका - शिवपुरी और सतनवाड़ा के पास
5. गेलिना - झाडर तथा मानपुर
6. लेटेराइट - शिवपुरी के पास रूहानी तथा कोलारस के पास खरई एवं तेंदुआ में
7.  वाक्साइट - विजरावन, गनेशखेड़ा, बामौर
8. इमारती पत्थर - धमकन , डविया, खुटेला, सतनवाड़ा, राजापुर, आदि।
9. ग्रेनाइट - पिछोर

वन

शिवपुरी जिले के कुल क्षेत्रफल का लगभग 19 प्रतिशत अर्थात 2398
वर्ग मील क्षेत्र में वन हैं। अधिकांश वैन चतुर्थ श्रेणी के हैं जिनमे मुख्यतः जलाऊ लकड़ी ही प्राप्त होती है। प्रायः 8 प्रकार के वन हैं। करघई, धौ, खैर, सलई, सागौन, मिश्रित, झाड़ीदार तथा घास के मैदान। 35 प्रतिशत क्षेत्र झाड़ीदार, 20 प्रतिशत खैर, 15 प्रतिशत करघई, शेष 30 प्रतिशत मिश्रित वन हैं। यहाँ पाए जाने बाले प्रमुख वृक्ष हैं: खैर, करघई, सलई, पलास, तेंदू, वेर आदि। जंगली कंद मूल फल हैं: हर्र, आंवला, सीताफल, आम, इमली, अनार, बेर, कैथ आदि।

प्रमुख जनजाति

जनजातियों में प्रमुख रूप से सहारिया हैं जिनका प्रमुख व्यवसाय खेती, खदान एवं जंगलों, ठेकेदारों के यहाँ मजदूरी करना है।

प्रमुख उद्योग

यह जिला औघोगिक  दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। फिर भी देश मे सर्वाधिक कत्था शिवपुरी जीके में होता है। एवं पत्थर खदान तथा तेंदूपत्ता प्रमुख उद्योग है। अन्य छोटे छोटे उद्योगों में सामान्य आवश्यकता की वस्तुओं के उद्योग हैं।

प्रमुख त्यौहार, जनजातियाँ, पर्व, मेले

15 अगस्त, 26 जनवरी, रक्षाबंधन, होली, दशहरा, दीपावली, शिवरात्रि, ईद, बड़ादिन आदि त्यौहार, गुरुनानक जयंती, गांधी जयंती, सुभाष जयंती, तात्या टोपे बलिदान दिवस तथा मकर सक्रांति पर्व तथा माह मार्च, अप्रैल, में शिवपुरी जिले में विभिन्न ग्रामों में देवी के मेलों का आयोजन किया जाता है।

लोकनृत्य

शिवपुरी जिले का लोकनृत्य राई है।

भाषा, बोली

समपूर्ण जिले की भाषा हिंदी है। परंतु करैरा, पिछोर, तहसीलों में दतिया झाँसी के निकट होने से यहाँ की बोली पर बुंदेलखंडी प्रभाव है। एवं पोहरी तहसील मुरैना व कोटा के निकट होने से राजस्थानी का प्रभाव है। कोलारस बदरवास क्षेत्र गुना के समीप स्थित होने से इधर की बोली पर मालवी का असर दिखाई देता है। निष्कर्ष रूप में शिवपुरी जिले की बोली में मालवी, बुंदेलखंडी, ब्रज आदि का प्रभाव है।

डकैत समस्या

ऊँची नीची घाटियों, जंगलों एवं नदियों के कारण पूर्व से ही यहाँ डाकू समस्या रही है। 1972-73 में शिवपुरी जिले में भी अनेक डाकुओं ने आत्मसमर्पण किया तथा अनेक डकैत पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके है परंतु वर्तमान में भी कभी कभी यह समस्या सामान्य जन जीवन को प्रभावित करती रहती है।

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