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Saturday, April 25, 2020

जानिए चांदपाठा झील या संख्या सागर झील के बारे में।


चांदपाठा झील


चांदपाठा झील

इसको संख्या सागर भी कहा जाता है। भदैया कुंड को छूती यह एक विशाल झील है। हरियाली से आच्छादित उत्तुंग पर्वतों की गोद मे लेटी यह झील प्रकर्ति प्रेमियों के लिए एक अप्रतिम आकर्षण का केंद्र है।

चांदपाठा झील


इसके एक किनारे पर स्वर्गीय महाराजा माधव राव सिंधिया द्वारा नौका विहार के लिए सन 1919 में निर्मित एक भव्य इमारत बनी हुई है इसे सैलिंग क्लब के नाम से जाना जाता है। यह क्लब आधा पानी के नीचे तथा आधा पानी के ऊपर बना हुआ है। क्लब को दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे कोई जहाज पानी पर तैर रहा हो। क्लब के अंदर नीले पानी के ऊपर थमा विशाल टीनशेड और हाथों में दीप उठाये दो नीग्रो सामने दिखाई देते हैं, यह मूर्तियाँ इंग्लैंड से मंगाई गई थीं। यहां बैठकर स्वर्गीय महाराजा के प्रकर्ति प्रेम का मूल्यांकन आसानी से किया जा सकता है। पहले इस झील में पर्यटक नौका विहार का आनन्द भी उठाते थे किंतु कुछ दुर्घटनाओं के बाद इसे प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह स्थल नगर से लगभग 6 किलोमीटर दूर स्थित है।

चांदपाठा झील

चांदपाठा झील

चांदपाठा झील

सख्‍या सागर झील और माधव सागर झील को 1918 में मनीय्यर नदी से बनाया गया था। यह झील माधव राष्‍ट्रीय पार्क के पास में ही स्थित है। यह झील माधव राष्‍ट्रीय पार्क के आसपास की जैव विविधता को बनाएं रखता है। यह पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है जहां कई वन्‍यजीव और चिडि़यां व सरीसृप सौहार्दपूर्वक रहते है।

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